‘आप’ के नेताओं की बढ़ी चिंता, 3 दिन से किसी नेता ने नहीं छोड़ी पार्टी|

चार दिन से आम आदमी पार्टी में में सब कुछ ठीक चल रहा है। किसी नेता के नाराज़ होने की खबर नहीं आई और न ही किसी नेता ने कोई ब्लॉग लिख कर कार्यकर्ताओं के नाम अपनी व्यथा सामने रखी है।
और तो और पूरे 8 दिन से किसी नेता का “लोकतांत्रिक प्रेम पत्र” भी मीडिया में न लीक होने से पूरे मीडिया में हड़कंप मच गया है।

छी न्यूज़ के वरिष्ठ पत्रकार रोहित ‘सुजाना’ का मानना है की पार्टी अब बेईमानी के सारे रिकॉर्ड तोड़ चुकी है तो वहीँ टाइम्स ‘भाउ’ वरिष्ठ कलाकार श्री अर्णब ‘भौंस्वामी’ ने 52637282919वीं बार घोषणा की है कि आम आदमी पार्टी मर कर दफना दी गयी है|

बेगानी शादी में अब्दुल्लाह दीवाना बनते हुए भाजपा प्र’भौंक’ता श्री लंपट पात्रा ने कहा की “आप अब बदल चुकी है । वहां कोई पारदर्शिता नहीं रह गयी है। और इसीलिए सारे नेता मीडिया से सब कुछ छुपाने की कोशिश कर रहे है।वहां अब सिर्फ तानाशाही चलती है।( हालाँकि ये कहने के बाद वो सीधा अमित “भाई” शाह के पास अपनी रुकी हुई पेमेंट माँगने के लिए उनके तलवे चाटने लगे)।

वहीँ शाज़िया ‘जुल्मी’ का मानना है की आप अपने उसूलों से भटक गयी है।(ये कहते हुए वो खुद ब्यूटी पार्लर जाने वाले रास्ते से भटक गयी)
आप के पूर्व वरिष्ठ और कर्मठ नेता श्री विनोद बिन्नी ने अपनी चुन्नी ठीक करते हुए कहा की उन्हें दुःख है की आप अपने उस ‘सवराज’ को भूल गयी है जिसकी शिक्षा खुद उन्हीने अरविन्द केजरीवाल को दी थी।(ये कहते ही अश्विनी उपाध्याय और दीपक ‘चोर’सिया उसी सवराज की दुहाई देते हुए उनकी जेब से चवन्नी चोरी कर के भाग गए)

जब हमने आप के नेताओं से जानने की कोशिश की तो योगेंद्र यादव जी ने इसपर बोलने से इंकार कर दिया।उनका कहना था की उनकी शहद की बोतल समाप्त हो गयी है।वे पहले मार्केट से नयी बोतल लेने जा रहे है ।तभी कुछ बोल पाएंगे।

संजय सिंह से बात करने पर पता चला की पार्टी में इस गंभीर विषय को लेकर काफी नाखुश है और वे इसे बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा की जरूरत पड़ी तो वो खुद पार्टी से 2 दिन के अंदर इस्तीफा देने को तैयार हैं। और यदि हालात और बिगड़े तो पार्टी के सारे नेता स्वराज के मॉडल के तहत एक दुसरे के घर जाकर सबसे इस्तीफा मांगने के लिए हर एक के घर धरना भी करेंगे।

वहीँ प्रशांत भूषण ने अंदर की बात बताते हुए कहा की उन्होंने अरविन्द को इसी बारे में एक एसएमएस भेजा है जिसके जवाब में अरविन्द ने रिप्लाई करते हुए कहा की “पार्टी में सब मिले हुए हैं” और उन्होंने ये आश्वसन दिया है की वो ये कतई बर्दाश्त नही करेंगे और इस एकता पर ‘रायता’ फैला देंगे।
हालांकि जब हमने खुद अरविन्द केजरीवाल से बात की तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि वे “तो बहुत छोटे आदमी हैं” और उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता।
तभी आशुतोष वहां अपनी किताब लेकर पहुँच गए जिसे देख केजरीवाल अपने चित-परिचित अंदाज़ में उन्हें मना कर के भाग गए।

कविराज कुमार विश्वास की माने तो वे और आशीष खेतान अंडमान और लक्षवादीप  में किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढने में लगे है जो मीडिया में जा कर आप की सदस्यता से इस्तीफा देकर केजरीवाल को तानाशाह करार दे कर पार्टी में स्वराज की मांग करे ताकि इस बुरे समय में पार्टी की लाज बचाई जा सके।
वहीँ एक कार्यकर्ता सम्मेलन में विश्वास जी ने कार्यकर्ताओ को हिम्मत बंधाते हुए कहा कि “माना की अँधेरा घना है, पर पार्टी से स्वराज की मांग कर इस्तीफा देना कहाँ मना है”।

हालांकि आप के आधिकारिक और सत्यवादी हरिश्चंद्र के दूत संगठन “अवाम” का मानना है की इसकी जड़ अरविन्द केजरीवाल की वो ‘फेविकॉल’ की बोतल है जिसे खुद अरविन्द के मुताबिक उन्होंने CM की कुर्सी पर लगाया था ताकि वो 5 साल कहीं न भागें। ‘अवाम’ का आरोप है कि केजरीवाल ने पार्टी से झूट बोला की उन्हीने वो पूरी बोतल कुर्सी पर ही ख़त्म कर दी।उनका मानना है की अरविन्द ने बोतल में फेविकॉल बचाये रखा था जो की अब पार्टी में “टूट-फूट” को रोके हुए है। अवाम ने इसकी जांच CID से करवाने की मांग की है।
आप के सम्मानित दादू श्री अशांति भूषण ने आवाम का समर्थन करते हुए उन्हें कानूनी सहायता देना का एलान किया है।

हालांकि पार्टी सूत्रों की माने तो आप नेताओं को विश्वास ही नहीं पूरा यकीन है की इस घोर संकट की घडी में अंजलि दमानिया पार्टी से 1235267वीं बार इस्तीफ़ा देकर पार्टी पर ‘अटूट सम्बन्ध’ होने के कलंक लगने से अवश्य ही बचा लेंगी।

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कल और आज के भगत सिंह होने का मकसद!

भगत सिंह, एक ऐसा नौजवान , जो दिखने में आपकी या मेरी तरह था। पर एक ऐसा क्रांतिकारी जिसने अपने नौजवानी के जोश में अपनी धरती माँ पर हो रहे अत्याचारो के खिलाफ ,साम्राज्यवाद के खिलाफ और अपनी आज़ादी के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। उस आज़ादी की लड़ाई में प्राणों की आहुति देंना कोई बड़ी बात नही थी। बहुत क्रांतिकारियों ने हँसते हँसते जान न्योछावर कर दी थी। परंतु जो बात उनको अलग करती है वो है उनका इतनी छोटी से उम्र में अथाह साहस और विषयों को समझने की क्षमता और उसे तर्क में प्रस्तुत करने की अदभुद कला। (चाहे उनकी “Why I Am an Athiest” किताब हो या फिर उनका वामपंथ के प्रति झुकाव। और ये बात इससे भी साबित होती है की जब आंदोलनकारियों को अपने विचार पूरे भारत में पहुंचाना चाहते थे तब ये जिम्मा हमारे भगत ने ही अपने सर पर लिया असेंबली में बम फेंक कर क्योंकि सिर्फ वाही कोर्ट में अपने तर्कों को सही तरीके से रख सकते थे |)

वो दौर आज़ादी पाने का था| उस जोश को आप क्रांतिकारी नाम दे दीजिये चाहे उसे आप पागलपन कह लीजिये या फिर आज के सन्दर्भ में बहु-चर्चित शब्द -“Anarchist”(अराजक)|

अब आ जाते है आज के समय में | आज का समय बिलकुल अलग है| भगत सिंह की उम्र में आज के नौजवान कहीं नौकरी या छोकरी ढूँढने में लग जाता है। कुछ महानुभाव और उच्च-स्तरीय/वर्गीय “cool dudes” सिगरेट,शराब,वोडका,ड्रग्स आदि मन-आनंदित करने वाली जैसी वस्तु ग्रहण करने में लग जाते है ताकि वो cool से supercool बन सके (हालांकि वो बात और है की वो सिर्फ “नामाकूल” बन कर रह जाते है)।कुछ लोग अपने appraisal के इंतज़ार में ही हर रात करवट बदलते काटते रहते हैं तो। आज लोग सोचते हैं की भगत सिंह पैदा तो हो परन्तु अपने नहीं दुसरे के घर में। परंतु फिर भी आज भी हमारे अंदर का देशभक्त जाग उठता है, वो दूसरी बात है की सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच ख़त्म होते ही वो कहीं सो जाता है। खून तो आज भी हमारा खौल उठता है परंतु सिर्फ भारत-पाक के मैच के दौरान| आजकल लोग फांसी पर तो चढ़ते हैं लेकिन तब जब खुद depression में हो या कोई सखी छोड़ कर चली गयी हो।या फिर तब जब 7वीं-8वीं की परीक्षा में फ़ैल हो जाते हैं या फिर तब जब किसी का गैंगरेप जैसा दैवीय कार्य किया हो। (वेसे कभी-कभार कुछ लोगो को ईमानदारी के लिए भी फांसी दे दी जाती है, जैसे कि डी.के. रवि, इसीलिए उतने बुरे हालात भी नही है।)

ये सब कहने का तात्पर्य ये नहीं की आप कुछ गलत कर रहे है। बस इतना की ये वक्त और दौर दूसरा है। आज देश हमसे न तो अपने प्राणों का बलिदान और न ही खून मांगता है|आज भारत माँ को अपने सुपुत्र/सुपुत्रियों से “पसीने” की उम्मीद है क्योंकि “बदलाव सोचते रहने से नही सिर्फ कर्म करने से आता है”। आप चाहे रिक्शा ड्राईवर ही क्यों न हों आपका योगदान उस व्यक्ति के लिए है जो अपने दफ्तर जा रहा है।उसमे भी गर्व करें । इसीलिए देश के प्रति अपने कर्त्तव्य को समझे और कुरीतियों से बचे।

भगत सिंह बनने के लिए आप को मंदिर,मस्जिद,चर्च तोड़ने की जरूरत नही है। देशभक्त होने के लिए आपकी छाती 56 इंच की नहीं भी हो तो भी चलेगी। जरूरी नही की आप ढोंग करने के लिए हर वर्ष 26,जनवरी,23 मार्च,15 अगस्त और 2 अक्टूबर को अपने मोबाइल पर देशभक्त गीत की रिंगटोन लगा दें या फिर FB/Twitter/Whatapp पर अपनी DP बदल कर पुण्य आत्माओं की फोटु लगा लें। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहे और देश के हर नागरिक को किस नज़र से देखते है । यही आपकी देशभक्ति का पैमाना होना चाहिए । यही भगत सिंह,सुखदेव और राजगुरु जैसी महान शख्सियतों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
दूसरे भगत सिंह बनने से ज्यादा आज महत्वपूर्ण यह है की आप कितने अच्छे “चुन्नू”,”मुन्नू” या “शुभम” है!

जय हिन्द ! इंकलाब जिंदाबाद !